एक कविता..

कौन कहता है शादी के बाद लड्के शहीद होते है...
जरा लडकीयों से भी पुछो हाल उनके दिल का..

उठके सुबह सवेरे...किचन की राह पकडती है..
दुध उबालके जल्दी से.."उनके" लिये चाय बनाती है..
पहले कभी नं होती थी सुबह उसकी इतनी जल्दी..
उठते ही मां ला देती थी हाथ मे चाय की प्याली..

नाश्ते में क्या बनाना है ये सवाल रोज उठता है..
नाश्ते और खाने के बीच नहाने का पानी उबलता है..
"उनकी" तयारी करते करते..खो जाती है वो
ऒफ़िस निकलती है बिना बाल सवारें वो..

दिनभर काम से नही फ़ुरसत
बोस गुर्राता है.
सहम सी जाती है वो..
पर काम तो करना पडता है..

वापस आते ही वहीं (खानेका) सवाल उठता है..
पैर कपकपाते है पर पेट आवाज करता है..
फिर बहू, बिवी का फ़र्ज..निभाना पडता है
दिन भर के तनाव के बाद भी खाना बनाना पडता है..

कहा टि.व्ही कहा पिक्चर..
निंद कबकी बना लेती है आंखोंमे अपना घर..
सुबह सवेरे उठके सिलसिला वही शुरु होता है..
शहीद हो रहा हूं कहने कॊ लडकों का क्या जाता है..

Comments

  1. dhanyavaad...pankaj ajay aaNi sangamnaath..

    ReplyDelete
  2. मस्त आहे, पण लग्नानंतर बदल दोघांमध्येही होतो, चांगला की वाईट हे माहित नाही ... :) ... मुलींचं लग्नानंतरचं आयुष्य मांडून मुलांचं शहीद होतो म्हणणं चुकीचं कसं ठरेल? दोघेही काहीतरी हरवून बसतात असं म्हणता येईल, मला अनुभव नाहीए त्यामुळे मी जास्त तोंड वाजवत नाही :)

    ReplyDelete
  3. hehe... chanach ahe kavita! especially the last stanza! :) way to go!

    ReplyDelete

Post a Comment

Popular posts from this blog

बाहुबली २

ऑर्गनायझेशन आणि पिंटरेस्ट

भुलाबाई आणि भुलोजी